"जीव की सेवा, जाति की नहीं"
"जो सेवा जाति देखकर की जाए, वह सेवा नहीं, अहंकार है। सच्चा साधु वही है जो हर जीव में परमात्मा को देखे।"
— परम पूज्य महर्षि औघड़दास बाबा जी
महर्षि औघड़दास बाबा जी
"आज भी प्रत्येक भक्त के हृदय में गूंजता है। आश्रम में श्री गजेन्द्र दुबे जी के संचालन में सेवा और साधना की ज्योति निरंतर प्रज्वलित है।"
धौरमती नदी के पूर्व में स्थित पड़ा सुआरन टोला के एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे पंडित सरयू प्रसाद जी का जीवन सन 1962 में अमरकंटक की यात्रा के दौरान पूरी तरह बदल गया, जब उन्हें 3100 वर्ष पुरानी आध्यात्मिक शक्ति का साक्षात्कार हुआ।
सेवा और साधना के तीन स्तंभ
शिव आराधना
आश्रम में प्रतिष्ठित श्री औधरेश्वर महादेव की नित्य शिव पूजा, जलाभिषेक और साधना।
अधिक जानें →रुद्र महायज्ञ
विश्व कल्याण और शांति हेतु सन 1990 से प्रारंभ हुई रुद्र महायज्ञों की अनवरत श्रृंखला।
अधिक जानें →दरिद्र नारायण सेवा
प्रत्येक माह की 9 तारीख को दीन-दुखियों को भोजन, वस्त्र और चिकित्सा सहायता वितरण।
अधिक जानें →आगामी कार्यक्रम और कार्यशालाएं
18 वर्षों से अनवरत
1990 से अनवरत
रुद्र महायज्ञ
विश्व कल्याण के उद्देश से कार्तिक माह में रूद्र महायज्ञ का आयोजन किया जाता है जो 1990 से अनवरत प्रारंभ है महायज्ञ की पूर्णआहुति कार्तिक माह की पूर्णिमा में ही होती है ऐसा विधान पूज्य बाबा जी द्वारा निशित किया गया था! रूद्र महायज्ञ की यह परंपरा अनवरत प्रारंभ है
आश्रम के कुछ पल
आश्रम पत्रिका से
ध्यान में मन की एकाग्रता कैसे प्राप्त करें?
ध्यान की प्रारंभिक अवस्था में चंचल मन को वश में करने के 5 प्रभावी प्राणायाम व ध्यान विधियाँ। जानिए कैसे दैनिक साधना से मानसिक शांति और एकाग्रता प्राप्त करें।
अद्वैत वेदांत: आत्मा और ब्रह्म का अभेद तत्व
उपनिषदों का सार तत्व अद्वैत वेदांत हमें सिखाता है कि सत्य एक ही है। जानिए अहंकार से मुक्ति और आत्मसाक्षात्कार का रहस्य।
सात्विक जीवनशैली और आयुर्वेद का रहस्य
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