"जीव की सेवा, जाति की नहीं"
"जो सेवा जाति देखकर की जाए, वह सेवा नहीं, अहंकार है। सच्चा साधु वही है जो हर जीव में परमात्मा को देखे।"
— परम पूज्य महर्षि औघड़दास बाबा जी
महर्षि औघड़दास बाबा जी
"जीव की सेवा, जाति की नहीं। जो सेवा जाति देखकर की जाए, वह सेवा नहीं, अहंकार है। सच्चा साधु वही है जो हर जीव में परमात्मा को देखे।"
परम पूज्य महर्षि औघड़दास बाबा जी ने अपना समूचा जीवन जगत कल्याण हेतु समर्पित कर दिया। सन 1990 में आश्रम की स्थापना के बाद, उन्होंने आजीवन अन्न का त्याग कर केवल आलू का सेवा किया।
सेवा और साधना के तीन स्तंभ
शिव आराधना
आश्रम में प्रतिष्ठित श्री औधरेश्वर महादेव की नित्य शिव पूजा, जलाभिषेक और साधना।
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विश्व कल्याण और शांति हेतु सन 1990 से प्रारंभ हुई रुद्र महायज्ञों की अनवरत श्रृंखला।
अधिक जानें →दरिद्र नारायण सेवा
प्रत्येक माह की 9 तारीख को दीन-दुखियों को भोजन, वस्त्र और चिकित्सा सहायता वितरण।
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आश्रम के कुछ पल
आश्रम पत्रिका से
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