उपनिषदों का सार तत्व अद्वैत वेदांत हमें सिखाता है कि सत्य एक ही है। जानिए अहंकार से मुक्ति और आत्मसाक्षात्कार का रहस्य।
अद्वैत वेदांत भारतीय दर्शन का मुकुटमणि है। आद्य शंकराचार्य जी ने महावाक्य "अहं ब्रह्मास्मि" तथा "तत्त्वमसि" के माध्यम से जीव और ईश्वर की मौलिक एकता का प्रतिपादन किया।
जब तक मनुष्य स्वयं को देह और मन मानता है, वह दुःख और बंधन का अनुभव करता है। जब ज्ञानाग्नि द्वारा अज्ञान का आवरण हटता है, तब यही बोध होता है कि सर्वत्र एक ही चेतना विराजमान है।